कभी कभी


हंसी खेल सी जाती है,  इन होठों पर 

कभी कभी जो तेरी याद आती है 

ये ज़माने भर का गम 

कुछ ही लम्हों के लिए ही सही 

कहीं दूर चला जाता है, मुझे छोड़कर 

और फिर 

एक मासूम सी हंसी खिलखिला जाती है 

होठों पर मेरे 

कभी कभी|| 



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